EVS Pedagogy Notes – पर्यावरण अध्ययन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन(C.C.E in Evs)

EVS Pedagogy Notes For CTET

Evs Pedagogy(Paryavaran adhyayan Mein satat evam vyapak mulyankan)

दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम पर्यावरण पेडगॉजी (EVS Pedagogy Notes) के पर्यावरण अध्ययन में अंतर्गत सतत एवं व्यापक मूल्यांकन  से संबंधित पोस्ट आप सभी के साथ शेयर कर रहे हैं।  इस पोस्ट में आप जानेंगे पर्यावरण अध्ययन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन से संबंधित संपूर्ण जानकारी। जोकि पर्यावरण पेडगॉजी(EVS Pedagogy Notes) में एक महत्वपूर्ण टॉपिक है पर्यावरण पेडगॉजी के अंतर्गत यह हमारा दसवा टॉपिक है.इससे पहले के टॉपिक की लिंक नीचे दी गई है, यदि आप उन्हें पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।  Topic-10

EVS Pedagogy Notes- पर्यावरण अध्ययन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन(C.C.E in Evs)

जब हम कभी कोई शिक्षण अधिगम क्रियाकलाप करते हैं, तो हमारे मन में उसे करने के कुछ उद्देश्य अवश्य होते हैं।  शिक्षण प्रक्रिया पूरा होने के बाद हम यह जानने का प्रयास करते हैं की प्रक्रिया से बच्चों ने सिखाया नहीं अर्थात शिक्षण प्रक्रिया का मूल्य निर्णय करते हैं।  दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि कार्यों का मूल्यांकन करते हैं।

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मूल्यांकन की प्रक्रिया का महत्व

  • मूल्यांकन प्रक्रिया शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता के बारे में निर्णय लेने में आपकी सहायता करती है।  शिक्षण का मूल्य निर्धारण कर सकते हैं।
  • प्रत्येक बच्चों की अधिगम प्रक्रिया के बारे में प्रतिपुष्टि प्राप्त कर सकते हैं।
  • यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि विद्यार्थियों ने कितना और कितनी अच्छी तरह से सीखा है।
  • अपनी अच्छाइयों और कमजोरियों को पहचान सकते हैं, और उसके अनुसार सुधार ला सकते हैं।
  • मंद गति छात्रों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की योजना बना सकते हैं।
  • तीव्र गति से सीखने वाले छात्रों के लिए  समुन्नयन कार्य की योजना बना सकते हैं ।

आकलन(Assignment) 

  • यह मूल्यांकन की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रमाण एकत्र करने का एक माध्यम है।
  • आकलन का अभिप्राय अंतिम निर्णय से नहीं बल्कि यह एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा विभिन्न  प्रेक्षण ( आंकड़ों) के मध्य तुलना की जाती है।
  • आकलन का उद्देश्य सीखने के दौरान बच्चों की उपलब्धि की गुणवत्ता को परखना है, अर्थात आकलन प्रक्रिया आधारित है।

मूल्यांकन( evaluation)

  • इसका उद्देश्य सीखने की निश्चित अवधि के बाद बच्चों की वास्तविक उपलब्धि स्तर को जांचना है।  बिना यह जाने कि बच्चे ने क्यों और कैसे यह स्तर प्राप्त किया है।
  • इस प्रकार मूल्यांकन एवं निर्धारित मानदंड के आधार पर बच्चे की गुणवत्ता को जांच करने और उस गुणवत्ता को एक मूल्य विशेष देना जैसे कि अंक अथवा ग्रेड प्रदान करना।
  • अतः हम कह सकते हैं कि मूल्यांकन उत्पाद आधारित है।
  • यह बच्चे की प्रगति की तुलना उसकी स्वयं की पिछली प्रगति से करता है, बजाय इसके कि किसी दूसरे बच्चे से उसकी प्रगति की तुलना करें।

सतत एवं व्यापक( समग्र) मूल्यांकन CCE

satat evam vyapak mulyankan

बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम(RTE अधिनियम 2009) अप्रैल 2010 से लागू किया जा चुका है।  अधिनियम के अनुसार CCE को प्रत्येक बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक लागू किया जाए।


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सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का अर्थ

  • मूल्यांकन को सभी तीन प्रमुख लक्ष्य संज्ञानात्मक, भावनात्मक एवं क्रियात्मक  लक्ष्य प्राप्त करने चाहिए।
  • सभी अधिगम( शैक्षिक और गैर शैक्षिक) अनुक्रमिक रूप में होते हैं, अर्थात सरल से जटिल की ओर।  जब तक सरल कार्यों पर अधिकार प्राप्त ना कर लिया जाए तब तक अगले स्तर को नहीं सीखा जा सकता है।  अतः मूल्यांकन सतत होना चाहिए।
  • सतत और व्यापक मूल्यांकन, निरंतर और व्यापक आधार पर शिक्षा और अन्य व्यवहार परिणामों का आकलन है।
  • सतत आकलन-  यह हमें संकेत देते हैं कि बच्चों के सीखने में कहां कहां कमी रह गई है।  जिस में सुधार करने के लिए शिक्षक उचित समय पर कदम उठा सके। साथ-साथ यह भी पता चलता है कि बच्चों को सीखने में कहां कठिनाई हो रही है, और कहां उन्हें विशेष मदद की जरूरत है।  सतत आकलन को आमतौर पर संरचनात्मक आकलन(summative Assessment) भी कहते हैं।
  • शिक्षक सोचते हैं कि सतत व व्यापक मूल्यांकन के लिए, प्रतिदिन उन्हें संकेतक ओ की एक बड़ी संख्या के आधार पर हर बच्चे की प्रगति का निरंतर रिकॉर्ड रखना है.  शिक्षकों को हर समय आकलन करने की जरूरत नहीं है। शिक्षक अपनी डायरी में सीखने सिखाने में सुधार के लिए केवल वही बातें रिकॉर्ड करें जो उन्हें वास्तविक रूप से उपयोगी लगे।
  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन विषय आधारित मूल्यांकन की प्रणाली है, जिसमें छात्र के विकास की सभी पक्ष शामिल है।
  • व्यापक\ समग्र आकलन –  इसका अर्थ बच्चों की सर्वांगीण प्रगति के बारे में जानकारी से है।  व्यापकता उन मुद्दों को प्रमुख रूप से रेखांकित करती है, जो बच्चों की विभिन्न  कौशल, भावात्मक और क्रियात्मक पक्ष को उजागर करें। व्यापक आकलन एक प्रकार का संकलित\   समेकित आकलन होगा।
  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन से यह भी एक गलत अवधारणा है कि प्रत्येक बच्चे को प्रोन्नति देनी है। चाहे वह सीखे या नहीं।  जबकि सतत और व्यापक मूल्यांकन का उद्देश्य है कि प्रत्येक बच्चे को सीखने सिखाने की प्रक्रिया के दौरान सीखने के भरपूर अवसर और सहायता मिले, जहां भी उसे जरूरत हो अर्थात शिक्षक पूरे वर्ष आकलन की जांच करें और उन विधियों को अपनाएं जिससे कि बच्चे के असफल होने या ना सीख पाने की नौबत ही नहीं आएगी( वर्ष के अंत तक)।
  • सतत एवं व्यापक मूल्यांकन को गलती से पूरी तरह से शिक्षक को ही जिम्मेदार  समझ लिया जाता है। वास्तव में CCE विभिन्न लोगों की संयुक्त जिम्मेदारी है।  जैसे- प्रशासक, अभिभावक, शिक्षक और बच्चे।
  • पर्यावरण अध्ययन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का लक्ष्य निम्न अधिगम क्षेत्रों में छात्र की विकास का निर्धारण करता है।

(1)  ज्ञान (2)  समझ\ व्यापकता (3)  लागू करना (4)  विश्लेषण करना (5)  मूल्यांकन करना (6)  सृजन करना

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन( रचनात्मक एवं योगात्मक आकलन)

निर्माणात्मक\ रचनात्मक मूल्यांकन( सीखने के लिए आकलन)(Formative Evaluation)

  • निर्माणात्मक  मूल्यांकन बच्चों की लगातार प्रतिपुष्टि(Feedback) के लिए सहायक है।  इससे बच्चों की सीखने की जरूरतों, पाठ इकाई में आने वाली कठिनाइयों का ज्ञान शिक्षक को मिलता है।
  • निर्माणात्मक मूल्यांकन से शिक्षक पाठ पढ़ते समय यह पता करता है, की छात्र ने पाठ की समझ  को कितना प्राप्त किया है।
  • रचनात्मक मूल्यांकन से छात्र तथा शिक्षक दोनों को अधिगम प्रक्रिया में लाभ मिलता है।

निर्माणात्मक मूल्यांकन के उद्देश्य(Objectives\Aims)

  • बच्चों की कमजोरियों को जानने में सहायता करता है।
  • छात्रों की व्यक्तिगत मार्गदर्शन में सहायता करता है। अर्थात बच्चों की प्रगति में सहायक है।
  • छात्रों को अध्ययन की ओर अग्रसर करता है।
  • यह शिक्षकों को मूल्यांकन के नतीजों को ध्यान में रखते हुए अपने अध्यापन की ओर प्रभावी बनाने तथा उसमें सुधार करने में सक्षम करता है।
  • यह छात्रों को स्वयं सीखने में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए मंच प्रदान करता है।
  • छात्रों को प्रतिक्रिया के बाद उनके काम को सुधारने का अवसर प्रदान करता है।
  • कैसे पढ़ाया जाना है, यह तय करने के लिए सीखने की विभिन्न शैलियों व विधियों को समाविष्ट करता है।
  • यह  नैदानिक और सुधारात्मक है।

निर्माणात्मक मूल्यांकन को “सीखने के लिए आकलन”(Assessment for Learning) भी कहा जाता है।  यह छात्रों को वह रचनात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जो उन्हें बेहतर सीखने और प्रभावी प्रगति करने में उनकी मदद करेगी।  यह अनौपचारिक होते हैं। यह कक्षा के संदर्भ में संपन्न होते हैं। यह पाठ के बीच बीच में किया जाता है। उदाहरण-  मौखिक प्रश्न उत्तर, कक्षा में वाद विवाद, अवलोकन डायरी



EVS Pedagogy Notes (*Topic Wise*) Notes

Topic-1 – पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा एवं क्षेत्र (Concept and scopes of Evs): click here

Topic-2 –  पर्यावरण अध्ययन का महत्व एवं एकीकृत पर्यावरण अध्ययन(Significance of Evs, Integrated Evs):  click here

Topic- 3 –  पर्यावरण अध्ययन(Environmental studies),पर्यावरण शिक्षा: click here

Topic- 4 –  अधिगम के सिद्धांत (Learning principles): click here

Topic- 5 – अवधारणा प्रस्तुतीकरण के उपागम (Approaches of Presenting Concepts): click here

Topic- 6 – पर्यावरण अध्ययन की शिक्षण अधिगम की विधियां(environment teaching method in Hindi) : Click here

Topic – 7 – EVS Pedagogy Activities (क्रियाकलाप) click here

Topic -8 & 9 – Practical Work And Steps In Discussion  Click here

योगात्मक\ संकलनात्मक मूल्यांकन (Summative Evaluation)

(सीखने का आकलन,Assessment of Learning)

  • इस मूल्यांकन सत्र के अंत में\ एक निश्चित अवधि के बाद होता है।  यह बच्चे की ओवरऑल परफॉर्मेंस को जानने के लिए किया जाता है।
  • योगात्मक मूल्यांकन अधिक औपचारिक होता है।

(उद्देश्य\ विशेषताएं) योगात्मक मूल्यांकन 

  • यह एक निश्चित अवधि में शिक्षक व छात्र की संपूर्ण गतिविधियों के बारे में बताता है।
  • इसके द्वारा एक शिक्षक यह जान सकता है कि  उसकी शिक्षण प्रक्रिया कितनी सफल रही।
  • योगात्मक मूल्यांकन में छात्र को अंक\ ग्रेड दिए जाते हैं, जो उनके प्रदर्शन के स्तर को बताते हैं।
  • यह शिक्षक को छात्रों की उपलब्धि के बारे में बताते हैं।

योगात्मक मूल्यांकन को “सीखने का आकलन”(Assessment of Learning) भी कहा जाता है।  इससे हम किसी कार्य को खत्म करके यह जांच करते हैं कि हमने कितना सीखा। उदाहरण –  पोर्टफोलियो, अर्धवार्षिक परीक्षा, सेमेस्टर एग्जाम, वार्षिक परीक्षा

मूल्यांकन के प्रतिमान\ प्रक्रिया (Pattern of Evaluation)

  • इसके अंतर्गत 4 रचनात्मक आकलन(FA), तथा 2 योगात्मक आकलन(SA) होते हैं।
  • प्रत्येक रचनात्मक आकलन(FA) छात्रों के अंतिम रिपोर्ट कार्ड में10% का  वेटेज लेता है।
  • पहले समेटिव एसेसमेंट \योगात्मक आकलन(SA) को अंतिम रिपोर्ट में 20% का वेटेज मिलता है।
  • जबकि दूसरे योगात्मक आकलन(SA) को 40% का वेटेज मिलता है।

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन/मूल्यांकन के चरण तथा उपकरण

मूल्यांकन के प्रमुख चरण

चरण1 –  जानकारी\ आंकड़े एकत्र करना

आप बच्चों को सीखने के बारे में जानकारी देने वाले एक महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं।आपकी अतिरिक्त कुछ और व्यक्ति\ स्त्रोत है।  जिनसे बच्चे के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

  • अभिभावक-  बच्चों के मित्र\ सहपाठी
  • अन्य शिक्षक-  समुदाय के सदस्य
  • पोर्टफोलियो बच्चे के प्रदर्शन का एक  समृद्ध स्त्रोत है। बच्चे की प्रगति के आकलन व रिपोर्टिंग के लिए उसके पोर्टफोलियो का उपयोग किया जाना चाहिए।  पोर्टफोलियो लिखते समय बच्चों द्वारा किए जाने वाले ग्रह कार्य परियोजना कार्य तथा अन्य कई कार्यो को ध्यान में रखना चाहिए।
  चरण 2- सूचनाओं का अभिलेखन
    • एकत्र की गई जानकारी\ आंखों का इस्तेमाल करते हुए शिक्षक बच्चे के सीखने में सुधार ला सकते हैं।  एवं फीडबैक दे सकते हैं। इसमें शिक्षक बच्चे की प्रगति की तुलना उसके स्वयं की पिछली प्रगति से करते हैं।




रिकॉर्डिंग के संबंध में ध्यान रखने वाली बातें निम्न है।

  • एक निश्चित अवधि के बाद बच्चे के कार्य का आकलन करें।
  • बच्चों के सीखने के स्तर के साथ उसके कार्य के बारे में विवरणत्मक टिप्पणी लिखें।
  • पोर्टफोलियो में बच्चे के कार्य के नमूने रखें और उनका आकलन करें।
चरण 3- प्रत्येक छात्र का प्रोफाइल तैयार करना।

छात्रों की किन्ही असामान्य घटनाओं, परिवर्तनो , कमियों, खूबियों, समस्याओं, विशेष अवलोकन को नोट करना।

चरण 4-  सुधार के लिए योजना बनाना
  • प्रति छात्र को सार्थक रूप से सीखने के अवसर प्रदान करना।
  • अधिक कमजोर जरूरतमंद छात्रों पर विशेष ध्यान देना।
  • अधिक उन्नत छात्रों को चुनौती देते हुए सार्थक शिक्षण  के अवसर उपलब्ध कराना।

मूल्यांकन के उपकरण(Tools of evaluation)  

1. निष्पादन परीक्षण( performance test)                    

निष्पादन परीक्षण एक ऐसा मूल्यांकन होता है।  जिसमें परीक्षार्थी को वास्तविक क्रिया या कोई कार्य करके दिखाना होता है।  ग्रेड तथा उपयोगी टिप्पणियां भी दी जाती है। इसे एक व्यक्ति से या समूह में करवाया जा सकता है। उदाहरण –  उपकरण का उपयोग करवाना, चित्र बनाना। इसमें अध्यापक को बच्चे की अधिगम शैली तथा निष्पादन संबंधित व्यापक सूचनाएं मिलती है।  शिक्षक तथा बच्चों के बीच संप्रेषण को बढ़ावा मिलता है, तथा स्वयं मूल्य- निर्धारण करने के अवसर भी  बढ़ते हैं।

2. प्रेक्षण(observation) 

अवलोकन\ प्रेक्षण शब्द का अर्थ है।  चीजों को एक उद्देश्य के साथ देखना\ व्यवहार का अवलोकन पर्यावरण अध्ययन के मूल्यांकन में अति अनिवार्य है।  सूचना एवं ज्ञान के अलावा यह बच्चों की मनोवृत्ति यू एवं मूल्यों को समझने में सहायता करती है। इसके द्वारा बच्चों की समस्या सुलझा ने की योग्यताएं, कक्षा में विविधता के प्रति प्रतिक्रिया विचारों एवं समाज का विकास आदि का पता लगाया जा सकता है।

3.  रेटिंग स्केल(rating scale)

निर्धारण मापनी\ रेटिंग स्केल, किसी परिस्थिति क्रिया के प्रति विचार या निर्णय की अभिव्यक्ति करने के लिए प्रयोग किया जाता है।  यह निर्णय एक पैमाने या मापनी पर मात्रा या गुणवत्ता के रूप में किए जाते हैं। रेटिंग स्केल बनाने के लिए एक अध्यापक को घटकों को मापना होता है।  उनकी पहचान करनी होती है। स्केल पर इकाइयां तथा वर्ग रखने होते हैं, ताकि उस घटक में बदलते हुए दर्जी में अंतर देखा जा सके तथा इन इकाइयों को सुसंगत विधि से वर्णित करना पड़ता है। उदाहरण-  कूड़े के निपटारे तथा उससे जुड़े मूल्य एवं प्रभावों को समझने के लिए रेटिंग स्केल।

क्र. कथन पूरी तरह सहमत सहमत पता नहीं असहमत पूरी तरह असहमत
1. घर को साफ रखना केबल  मां की जिम्मेदारी है।  
2. कूड़े को घर के बाहर फेंकना चाहिए।
3. वनस्पति के व्यर्थ भाग से खाद बनाने चाहिए
4. रद्दी सामग्री को जला देना चाहिए।
4. साक्षात्कार(Interview)

साक्षात्कार की विधि में परीक्षण करता आदमी\ बच्चे से बातचीत करके सूचनाएं एकत्र करता है।

5. संचित अभिलेख पत्र( cumulative record)

छात्रों के व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों में आए परिवर्तनों एवं उपलब्धियों को एक प्रपत्र में लिखकर सुरक्षित रखा जाता है। उदाहरण-  बच्चों का मानसिक, शारीरिक, नैतिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक अभिलेख तैयार करना।

6. घटनावृत्त(Anecdatal Record)

स्कूल में घटित होने वाली दैनिक घटनाओं का विवरण भी बालकों के व्यवहार परिवर्तन का मूल्यांकन करने में सहायता करता है।  इसमें किसी घटना में बच्चे के व्यवहार के बारे में रिकॉर्ड रखा जाता है।

7.  पोर्टफोलियो (Portfolio) 

पोर्टफोलियो में बच्चे की केवल कार्यों के नमूने ही नहीं बल्कि सभी तरह के कार्यों के नमूने रखे जाते हैं, ताकि पूरे वर्ष  घर में बच्चे के विकास और प्रगति को देखा जा सके। पोर्टफोलियो शिक्षक और अभिभावकों दोनों को यह जानने में मदद करते हैं कि बच्चे ने  कितना सीखा और यह बच्चे द्वारा किए गए कार्यों का एक रिकॉर्ड है, नाकी केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों का रिकॉर्ड इसमें बच्चे की रुचि क्षेत्र व्यक्तिगत विशेषताएं तथा सामाजिक गुण की जानकारी मिलती है।

इस पोस्ट में हमने जाना (पर्यावरण पेडगॉजी (EVS Pedagogy Notes))पर्यावरण अध्ययन में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन एवं रचनात्मक एवं योगात्मक  आकलन, मूल्यांकन के चरण एवं उपकरण पर्यावरण पेडगॉजी के अंतर्गत यह टॉपिक अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है आशा है।  यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी।   अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को भी लाइक कर सकते हैं। आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आप सभी को शुभकामनाएं!!!!!

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