CTET/UPTET 2021 Kohlberg Moral Development Notes & MCQ: टीईटी परीक्षा मे कोहलबर्ग सिद्धांत से पूछे जाएंगे ये सवाल, अभी देखें

CTET/UPTET 2021 (Kohlberg Moral Development Notes and MCQ): यदि आप शिक्षक बनने के लिए सीटेट तथा यूपीटेट जैसी परीक्षाओं में सम्मिलित होने जा रहे हैं तो आपको तो Kohlberg Moral Development (कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धान्त) टॉपिक को आपको अच्छे से पढ़ लेना चाहिए इस टॉपिक से परीक्षाओ मे हमेशा प्रश्न पूछे जाते रहे है। इसीलिए इस आर्टिकल मे हम Kohlberg Moral Development Notes शेअर कर रहे है, जिसमे हमने —  कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धान्त क्या है?  नैतिकता का अर्थ एवं विकास की अवस्थाएं सहित परीक्षा मे पूछे जाने वाले  कोहलबर्ग से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न आदि कवर किया है। आशा है ये जानकारी आपको आगामी परीक्षा मे सहायता करेंगी।

लारेन्स कोलबर्ग (Lawrence Kohlberg कौन थे?

photo: Lawrence Kohlberg
लॉरेंस कोल्हबर्ग ( 25 अक्टूबर, 1927 - 19 जनवरी, 1987) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे इन्हें नैतिक विकास के चरणों के अपने सिद्धांत के लिए जाना जाता है। उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षा के ग्रेजुएट स्कूल में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लॉरेंस कोहलबर्ग ने 1970 में नैतिक विकास ( theory of moral development) सिद्धांत का विकास किया।

Kohlberg Moral Development Notes (कोहलबर्ग सिद्धांत के नोट्स )

कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत (Lawrence Kohlberg’s Theory of Moral Development)

कोलबर्ग ने बच्चों के साथ 20 साल तक विशेष प्रकार से साक्षात्कार का प्रयोग करने के बाद बताया कि नैतिक विकास के छह चरण हैं जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है इन छह चरणों में से प्रत्येक चरण नैतिक सुविधाओं को समझाने में अपना पूर्व चरण से अधिक परिपूर्ण है। बालको में चरित्र निर्माण या नैतिक विकास के संदर्भ में लॉरेंस कोहल वर्ग ने अपने अनुसंधान के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि बालकों में नैतिकता या चरित्र के विकास की कुछ निश्चित एवं सार्वभौमिक अवस्था में पाई जाती हैं।

नैतिकता का अर्थ (meaning of morality)

  • नैतिक व्यवहार जन्मजात नहीं होता है इसे सामाजिक परिवेश से सीखा या अर्जित किया जाता है।
  • सबसे पहले बालक का अनौपचारिक रूप से अपने आस-पड़ोस तथा स्कूल में नैतिक विकास होता है।
  • जब बालक का जन्म होता है तो वह नैतिक होता है और ना ही अनैतिक होता है बल्कि वह अच्छा या बुरा आचरण समाज से सीखता है इसलिए कहा जाता है कि विकास की प्रक्रिया में वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

नैतिक विकास की ये अवस्थाएं निम्नलिखित है

1.पूर्व परंपरागत अवस्था/pre conventional stage( 4 से 10 वर्ष) –

इस स्तर के अंतर्गत दो अवस्थाएं होती है

  • आज्ञा एवं दंड की अवस्था (stage of order and punishment)
  • अहंकार की अवस्था (stage of ego)

(i) आज्ञा वा दंड की अवस्था

  • कम आयु व अपरिपक्व होने के कारण बच्चा डरता है की कामना किया जाए तो उसे दंड दिया जाएगा
  • परिवार के सदस्य बच्चे को कार्य करने का आदेश देते हैं उस कार्य को ना किया तो बच्चे को दंडित किया जाता है

(ii) अहंकार की अवस्था

  • जैसे- जैसे बच्चे की आयु बढ़ती है वह परिपक्व होता है
  • यदि उसका उद्देश्य झूठ बोलने से पूरा होता है तो भूख लगने पर चुराकर खाना खा लेगा
  • तो यह क्रिया अहंकार की अवस्था में आती हैं

2. परंपरागत अवस्था / conventional stage (10 से 13 वर्ष)

इसे भी दो उप अवस्था में विभाजित किया जाता है

  • प्रशंसा की अवस्था (stage of appreciation )
  • सामाजिक व्यवस्था के प्रति सम्मान की अवस्था (speech of respect for social system )

(i) प्रशंसा की अवस्था

  • इस अवस्था में बच्चा जो भी करता है वह दूसरे लोगों के द्वारा उसकी प्रशंसा करें करने के लिए करता है
  • दूसरी ओर समाज के सदस्य बच्चों से विशेष अपेक्षाएं करने लगते हैं तो समाज सेवा ने स्वीकृति मिलने लगती है इस अवस्था में बच्चों ने व्यवहारों को उचित व नैतिक मानते हैं जिनके लिए वे परिवार स्कूल पड़ोसी मित्र मंडली से प्रशंसा प्राप्त करते हैं
  • इस प्रकार हम कह सकते हैं किस अवस्था में बच्चे की चिंतन का स्वरूप समाज और उसके परिवेश से निर्धारित होता है

(ii) सामाजिक व्यवस्था के सम्मान की अवस्था

  • नैतिक विकास की अवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है
  • कॉल के अनुसार समाज के ज्यादातर सदस्य नैतिक विकास किस अवस्था तक पहुंच जाते हैं
  • इस अवस्था में प्रवेश से पहले बालक समाज को केवल इसलिए महत्वपूर्ण मानता है कि वह उसकी प्रशंसा करता है
  • अब समाज को स्वयं एक लक्ष्य ने लगता है

3. उत्तर परंपरागत अवस्था/post conventional stage(13 वर्ष से अधिक)

(i) समाज के साथ संबंध

कोई भी बालक इस अवस्था में समाज के प्रति अच्छा कार्य करता है वह नहीं जाता कि समाज के साथ उसका समझौता टूटे

(ii) सार्वभौमिक संबंध

इस अवस्था में बालक विवेक का प्रयोग करता है और कुछ नियम अपने आप से बनाता यह देखता है कि समाज में क्या अच्छा है और क्या बुरा , इस अवस्था में बालक अपने मन से कार्य करता है

ये भी पढ़ें: Inclusive Education (समावेशी शिक्षा) के महत्वपूर्ण सवाल जो टीईटी परीक्षा मे पूछे जाते है

Kohlberg theory Questions and Answers for CTET UPTET and ALL TET— कोहलबर्ग से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न

Q. 1 कोहलबर्ग के अनुसार सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को कहा जाता है –

a. नैतिक यथार्थवाद

b. नैतिक दुविधा

c. सहयोग की नैतिकता

d. नैतिक तर्कणा

Ans- d

Q.2 एक बच्चा तर्क प्रस्तुत करता है – “आप यह मेरे लिए करें और मैं मैं आपके लिए करूंगा। “यह बच्चा कुबूल वर्कर की नैतिक तर्कणा की किस अवस्था के अंतर्गत आएगा ?

a. सहायक उद्देश्य अभिमुखीकरण

b. दंड और आज्ञापालन अभिमुखीकरण

c. अच्छा लड़का -अच्छा लड़का अभिमुखीकरण

d. सामाजिक अनुबंध अभिमुखीकरण

Ans-a

Q.3 कोहलवर्ग के अनुसार शिक्षक बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास कर सकता है ?

a. कैसे व्यवहार किया जाना चाहिए इस पर कठोर निर्देश देकर

b. धार्मिक शिक्षा को महत्व देकर

c. व्यवहार के स्पष्ट नियम बनाकर

d. नैतिक मुद्दों पर आधारित चर्चाओं में उन्हें शामिल करके

Ans -d

Q.4 कोहलवर्ग के सिद्धांत के योगदान के रूप में निम्नलिखित में से किसे माना जा सकता है ?

a. उनका विश्वास है कि बच्चे नैतिक दार्शनिक हैं ।

b. उनके सिद्धांत ने संज्ञानात्मक परिपक्वता और नैतिक परिपक्वता के बीच एक सहयोग का समर्थन किया है ।

c. इस सिद्धांत में विस्तृत परीक्षण प्रक्रियाएं है ।

d. यह नैतिक तर्क और कार्यवाही के बीच एक स्पष्ट संबंध स्थापित करता है ।

Ans-b

Q. 5 कोलबर्ग कि सिद्धांत की प्रमुख आलोचना क्या है ?

a. कोलबर्ग ने बिना किसी अनुभूतिमूलक आधार के सिद्धांत प्रस्तुत किया

b. कोह्लबर्ग नैतिक विकास की स्पष्ट अवस्थाओं का उल्लेख नहीं किया

c.. कोलबर्ग  ने प्रस्ताव दिया कि नैतिक तार्किकता विकासात्मक है

d. कोलबर्ग में पुरुष एवं महिलाओं की नैतिक तार्किकता में सांस्कृतिक विभिन्नताओं को महत्व नहीं दिया

Ans- d

Q.6 कोहलवर्ग में नैतिक विकास के विचार में ___ का स्तर है।

a. तीन

b. चार

c. दो

d. छः

Ans- a

Q.7 निम्नलिखित में से कौन सा कोलबर्ग के नैतिक विकास के चरणों की विशेषता है ?

a. चरणों का परिवर्तनशील अनुक्रम

b. विभिन्न चरण अलग-अलग प् प्रत्युतर है न कि सामान्य प्रतिमान

c. सभी संस्कृत्यो से संबंधित चरणों की सार्वभौम श्रृंखला

d. विभिन्न चरण एक गैर पदानुक्रम रूप से आगे की ओर बढ़ते हैं

Ans – c 

Q. 8 आप एक शिक्षिका/शिक्षक के रूप में रैगिंग और धमकाने में सख्त विरोधी हैं तथा इस संदर्भ में विद्यालय में पोस्टर लगवाते हैं, तथा समिति बनवाते हैं ,आप से जुड़ने वाले किशोर जो इस विचार के दृढ़ विश्वासी है ,निम्नलिखित में से किस स्तर पर आएंगे ?

a. पारंपरिक स्तर ।

b. पूर्व पारंपरिक स्तर ।

c. उत्तर पारंपरिक स्तर ।

d. सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने वाला स्तर ।

Ans- c

Q . 9 लॉरेंस कोहलवर्ग के सिद्धांत में कौन सा स्थान नैतिकता की अनुपस्थिति को सही अर्थों में सूचित करता है ?

a. स्तर 3

b. स्तर 4

c. स्तर 1

d. स्तर 2 .

Ans- c

Q.10 कोहलवर्ग के सिद्धांतों के पूर्व परंपरागत स्तर के अनुसार, कोई नैतिक निर्णय लेते समय एक व्यक्ति निम्नलिखित में से किस तरह प्रवक्त होगा ?

a. अंतर्निहित संभावित दंड

b. व्यक्तिगत आवश्यकताएं एवं इच्छाएं

C. व्यक्तिगत मूल्य

d. पारिवारिक अपेक्षाएं

Ans- a

All Subject Pedagogy In Hindi

1.EVS Pedagogy Complete NotesClick Here
2.Maths Pedagogy Complete NotesClick Here
3.Hindi Pedagogy Complete NotesClick Here
4.Science Pedagogy  NotesClick Here
5.English Pedagogy Complete NotesClick Here
6.social science pedagogy  NotesClick Here
7.Sanskrit pedagogy  NotesClick Here

CTET / UPTET सहित सभी TET परीक्षाओ की ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारे Social Media Handle को जरूर फॉलो करें। आप CTET परीक्षा से संबन्धित किसी भी जानकारी के लिए नीचे कमेंट करके अपने प्रश्न पूछ सकते है।

Follow Facebook – Click Here
Join us on Telegram – Click Here
Follow us on Twitter – Click Here

Leave a Comment

error: Content is protected !!