Practical Work And Steps In Discussion | EVS Pedagogy In Hindi

Practical Work And Steps In Discussion

EVS Pedagogy Notes

(Practical Work And Steps In Discussion)

आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए paryavaran pedagogy(EVS Pedagogy) के अंतर्गत प्रयोग\ प्रायोगिक कार्य (Experimentation\ practical work) ओर परिचर्चा/Discussion/ परिचर्चा के चरण(Steps in Discussion) के संबंध में संपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं ।  इस  प्रयोग\ प्रायोगिक कार्य (Experimentation\ practical work) के अंतर्गत हम जानेंगे पर्यावरण अध्ययन के लिए उपयुक्तता,चुनौतियां,प्रयोगों के उदाहरण,पिछले वर्ष पूछे गए प्रश्न तथा परिचर्चा/Discussion  के अंतर्गत  छोटे समूहों में परिचर्चा,बज्ज समूह,छोटी समूह में परिचर्चा संचालन के चरण,एक शिक्षक के लिए ध्यान रखने योग्य बातें,पर्यावरण अध्ययन में परिचर्चा का महत्व,प्रभावशाली समूह परिचर्चा को प्रोत्साहित करना सभी विषयों को विस्तार पूर्वक इस आर्टिकल में आपको जानकारी प्राप्त होगी है, कि यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी होगी । 



Topic 8  

प्रयोग\ प्रायोगिक कार्य (Experimentation\ practical work)

पर्यावरण अध्ययन की पुस्तकों में कई मजेदार प्रयोग दिए गए हैं।  साथ ही इन प्रयोगों को लेकर कुछ सवाल भी है। इन सवालों के जवाब तभी मिल सकते हैं जब आप स्वयं प्रयोग करके देखेंगे।  प्रयोग अक्सर कारण प्रभाव संबंध स्थापित करने में सहायता करते हैं। इनमें पूछताछ, अवलोकन, उपलक्षणों तथा परिकल्पना की जांच करना होता है।  किसी विशेष प्रकरण को प्रयोग की मदद से पढ़ना सरल किया जा सकता है।

पर्यावरण अध्ययन के लिए उपयुक्तता –

  • बच्चों को अमूर्त  अवधारणा को समझने के लिए योग्य बनाने में।
  • वैज्ञानिक प्रवृत्ति, परिकल्पनाएं बनाने, खोज तथा छानबीन करने के योग्य बनाने में सहायता करते हैं।
  • अवलोकन करने तथा विश्लेषणात्मक चिंतन के कौशल बढ़ाने में।
  • व्यवहारिक ज्ञान देने में।
  • बच्चों ने जो सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त किया है उसे प्रयोग में लाने के योग्य बनाने में।

चुनौतियां-

  • शिक्षक को पहले से तैयारियां करनी पड़ सकती हैं।
  • आप हर बच्चे को प्रयोग नहीं करवा सकेंगे, कुछ  बच्चों को दर्शक की तरह सम्मिलित करना पड़ेगा।
  • कुछ प्रयोग बच्चों द्वारा कक्षा\ घर में किए जा सकते हैं, कुछ प्रयोगों के लिए यंत्रों तथा प्रयोगशाला की सुविधाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • कुछ प्रयोगों में लगातार निगरानी तथा मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है।

प्रयोगों के उदाहरण

(1)  कौन घुला कौन नहीं?

कौन सी चीजें पानी में घूमती है, और कौन नहीं? यह पता करने के लिए कुछ चीजों की तालिका बनाओ और अनुमान लगाओ।

चीजों के नाम
अनुमान
घुली\नहीं घुली
अनुमान सही\ गलत
शक्कर घुलेगी घुली  – सही
कागज
नमक
 मोम
चॉक





तालिका में दी गई चीजों को इकट्ठा करो।  अब बारी बारी से किसी कटोरिया गिलास में पानी लेकर उसमें डाल कर थोड़ी देर रुक कर देखो।  फिर देखो अनुमान सही है या नहीं।

(2) कौन ज्यादा घुला?

शक्कर और नमक दोनों ही पानी में घुल जाते हैं।  अनुमान से बताओ, दोनों में से कौन ज्यादा मिलता है?

(3)  कौन डूबा और कौन तैरा।

(4) लेंस से कागज  जलाना।

(5)  भूमि संरक्षण का प्रयोग।

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इस टॉपिक पर पिछले वर्ष पूछे गए प्रश्न

प्रश्न-  शिक्षक द्वारा प्रदर्शित एक कटोरी में पानी उबालने और उसका वाष्पीकरण हो जाने के प्रयोग को देखने के बाद 7 से 8 वर्ष के बच्चों के  द्वारा दिए गए उत्तर इस प्रकार हैं-

” पानी गुम हो गया।”

” कटोरे ने पानी सोख लिया।”

” आग ने पानी पी लिया।”

” भगवान ने पानी पी लिया।”

प्रश्न1-  यह उत्तर बच्चों और उनके विचारों के बारे में क्या  बताता हैं?

(a)  बच्चे अच्छा अवलोकन नहीं कर पाते।

(b) वाष्पीकरण के बारे में बच्चों के  विकल्प विचार है।

(c) बच्चों के उत्तर तर्कसंगत नहीं है।

(d)  बच्चों की सोच गलत है।

उत्तर- b

प्रश्न2  शिक्षक को इन उत्तरों का सामना किस प्रकार करना चाहिए?

(a) उनके विचारों तक पुनः पहुंचने के लिए  एक चर्चा प्रारंभ करें।

(b) बच्चों को बता दें कि वह गलत है।

(c)  जल चक्र का एक मानक चार्ट प्रदर्शित करें।

(d)  वाष्पीकरण की परिभाषा दें और बच्चों को उसे याद रखने के लिए कहे।

उत्तर- a

ये भी जाने- 

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EVS Pedagogy Notes (*Topic Wise*) Notes

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Topic-9

परिचर्चा/Discussion/ परिचर्चा के चरण(Steps in Discussion)

बच्चों के साथ  परिचर्चा( बातचीत) करना उनके विचारों को जानने का  वह महत्वपूर्ण हथियार है। जिससे वस्तुओं को देखने के उनके नजरिए में मदद मिलती है।  बातचीत द्वारा बच्चे महत्वपूर्ण तरीके से सोच सकते हैं, तथा संवेदनशील जैसे लिंग, भेद,  जाति, अंधविश्वास पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इस प्रकार के मुद्दों के बारे में प्रत्यक्ष रूप से बात करना ज्यादातर मुश्किल होता है, क्योंकि वह हमारे सामाजिक स्थिति का एक हिस्सा है, परंतु संवाद द्वारा हमें इस बात का अवसर मिलता है, कि हम हमारे स्वयं के विचारों पर प्रश्न उठा सकें।  इस प्रकार की परिचर्चा के लिए अखबारों की रिपोर्ट पोस्टर, चित्र, छायाचित्र, आदि को शुरुआती स्तर पर उपयोग में लाया जा सकता है।

छोटे समूहों में परिचर्चा

  • समूह चर्चा उन तरीकों में से एक है।  जिससे बच्चों में सहयोगी को बढ़ावा मिलता है।  समूह चर्चा बच्चों को अधिगम के अवसर प्रदान करती है।  बच्चों में विश्लेषण तथा संप्रेषण के कौशलों का विकास होता है।
  • छोटे समूहों में चर्चा समूहों के ऐसे अभ्यास है,  जो कि बच्चों को हम उम्र बच्चों में घुल मिलकर अधिगम करने में सहायता करता है।
  • छोटे-छोटे समूहों में बच्चे पर्यावरण से जुड़े हुए कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं।  शिक्षक होने के नाते आप इस प्रक्रिया को बढ़ावा दें ताकि वह अपने विचारों पर चर्चा करें उन्हें बांटे तथा पर्यावरण से जुड़ी हुई किसी समस्या या मुद्दे का समाधान सोचे।
  • बच्चों को छोटे समूहों में प्रभावशाली ढंग से कार्य करवाने के लिए  आवश्यक है कि आप अपनी दोहरी भूमिका को समझें विषय वस्तु के विशेषज्ञ एवं समूहों के प्रबंधक  के रूप में तथा समूह के कार्य को विषय वस्तु के बढ़ाने तथा उसके तरीकों के प्रबंधन के लिए जिसके द्वारा समूह के अधिगम उद्देश्यों की प्राप्ति हो पाए।

NOTE :  बज्ज समूह : “बज्ज समूह  एक छोटा सा समूह जिसमें तीन से छह व्यक्ति होते हैं, और उन्हें एक मुद्दा या समस्या चर्चा के लिए दी जाती है, तथा थोड़े से ही समय में उससे जुड़ा कार्य दिया जाता है।  सामान्यतः हर बज्ज समूह अपना काम रिकॉर्ड करके बड़े समूहों के सामने पेश करता है।”

छोटी समूह में परिचर्चा संचालन के चरण

  • शिक्षा कक्षा को छोटे-छोटे समूह (लगभग 4 से 5 सदस्य) में बांट देता है।
  • शिक्षक सामान्य\ कथन\ प्रश्न को समूह के सामने रखता है।
  • समूह की चर्चा के लिए 10 से 15 मिनट दिए जाते हैं।
  • समूह का हर सदस्य इस कथन के संबंध में अपने विचार रखता है।  इसके बाद समूह के सभी सदस्य उस पर चर्चा करते हैं, बहस होती,  विचार बदलते हैं इत्यादि।
  • इस प्रकार   सृज़ित विचारों  अन्य बिंदुओं मतों के  पुनरीक्षण,संगठन तथा रिकॉर्ड करने के लिए प्रत्येक समूह कुछ समय लगाता है।
  • प्रत्येक समूह पूरी कक्षा के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करता है।

एक शिक्षक के लिए ध्यान रखने योग्य बातें-

  •  प्रत्येक चर्चा एक उद्देश्य अभिमुख हो अर्थात इसका विषय से जुड़ा हुआ शैक्षिक उद्देश्य हो।
  • तथ्य कक्षा की आयु, रुचि  तथा पाठ्य चर्चा के अनुकूल हो।
  • बच्चों को तथ्य के बारे में पर्याप्त ज्ञान हो ताकि वे चर्चा में सक्रियता से भाग ले  सके।
  • बच्चे उस भाषा में अपने विचार पेश कर पाए  जो उनके लिए सुविधाजनक हो।
  • किसी भी दृष्टिकोण या मत का निरादर नहीं करना और उस पर हंसना नहीं।

आपने अंत में सभी समूहों के कार्य को एकत्र कर उनका सार  सब को बताना है, तथा बच्चों ने जो पाठ्यपुस्तक में पड़ा उसके साथ उनका संबंध स्थापित कर आना है।

पर्यावरण अध्ययन में परिचर्चा का महत्व

  • पर्यावरण अध्ययन एक बहु विषयक अध्ययन क्षेत्र है।  समूह में चर्चाएं समस्या या मुद्दे संबंधित विषयों के बीच की सीमाएं तोड़ने में कारगर सिद्ध होते हैं। उदाहरण-  मृदा, जल या हवा का प्रदूषण – चर्चा इस बात का अवसर प्रदान करेगी कि इससे जुड़े हुए सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक पक्षों को सामने लाए।  
  • जटिल सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों में, किसी एक उत्तर से सभी संबंधित समूहों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता है।  हमें बहुमुखी संभावनाओं तथा अलग प्रकार के समाधान ओं को पैदा करने की आवश्यकता है। समूह चर्चा यह संभव करती है।
  • कक्षा में वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को लाने में सहायता करती है।
  • एक ही मुद्दे पर भिन्न प्रकार के विचार जो कि विभिन्न विश्वासों, प्राथमिकताओं, संस्कृतियों एवं संदर्भों पर आधारित होते हैं. सामने आते हैं।  बच्चे भिन्नता ओं का सामना करना तथा उन्हें समझना सीखते हैं।
  • इस प्रकार से सीखने की प्रक्रिया बच्चों में बहुमुखी चिंतन,  गहन चिंतन, सुनने की योग्यता एवं अंतरस्वव्यक्तित्व कौशलों का विकास करती है।
  • सकारात्मक  आंतरिक संबंध स्थापित करने में सहायता करती है।
  • बच्चों के दिमाग में विषय संबंधी कठोरता नहीं  होती। व पर्यावरण अध्ययन के आधार से विषय संबंधी सीमाएं धीरे-धीरे विकसित करेंगे।

प्रभावशाली समूह परिचर्चा को प्रोत्साहित करना

  • याद रखें कि आपकी भूमिका एक संसाधन की है।
  • समूह के हर बच्चे को लीडर बनने का अवसर दें।
  • भागीदारी के लिए सकारात्मक प्रतिपुष्टि दें।  बच्चों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दें।
  • हर सत्र के बाद चर्चा का सार पेश करें।
  • समूह बनाते समय यह सुनिश्चित करें कि हर समूह की रचना संतुलित हो अर्थात हर समूह में विभिन्न व्यक्तित्व है।
  • ” क्यों”  और ” कैसे” वाले प्रश्न पूछे तथा यदि बच्चे संक्षिप्त में उत्तर दें तो उन्हें विस्तार से उत्तर देने को कहें। 
  • चर्चाएं उस समय अधिक प्रभावशाली होती है।  जब शिक्षण विधियों के साथ मिलाकर इनका प्रयोग किया जाए।
  • समूह के सलाहकार के रूप में सहायता करें, मार्गदर्शन दें तथा बच्चों की सोच को दिशा प्रदान करें तथा विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करें।
  • याद रखें कि निशब्द संप्रेषण जैसे की सहमति में सिर हिलाना, मुस्कुराना बच्चों के लिए सकारात्मक संदेश है।  बच्चों की ओर से भी निशब्द संदेशों का ध्यान रखें

 

समूह चर्चा की सीमाएं

  • बच्चों को भी तैयारी करनी पड़ती है।  
  • चर्चा को सफल बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, काफी समय लगता है।
  • उच्च स्तर के ध्यान तथा लगन की आवश्यकता होती है।
  • समूह चर्चा की योजना शिक्षक को सावधानीपूर्वक बनानी पड़ती है।

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दोस्त में हमने जाना EVS Pedagogy Notes के अंतर्गतप्रयोग\ प्रायोगिक कार्य (Experimentation\ practical work) ओर परिचर्चा/ Discussion/ परिचर्चा के चरण(Steps in Discussion) के विषय में संपूर्ण जानकारी| यदि आप अन्य किसी विषय पर पोस्ट प्राप्त करना चाहते हैं।  तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते हैं।  ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारे वेबसाइट को बुकमार्क अवश्य करें ताकि आपको आने वाली सभी महत्वपूर्ण जानकारियों का पता लग सके  आगामी परीक्षा के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!

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