वाइगोत्सकी का सिद्धांत: Vygotsky ka Sangyanatmak Vikas ka Siddhant

वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

इस पोस्ट में हम वाइगोत्सकी का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Vygotsky ka Sangyanatmak Vikas ka Siddhant) का अध्ययन करेंगे।  वाइगोत्सकी के अनुसार संज्ञानात्मक विकास पर सामाजिक कारकों एवं भाषा का प्रभाव पड़ता है इसीलिए इस सिद्धांत को सामाजिक संस्कृति सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है।

Vygotsky ka Sangyanatmak Vikas ka Siddhant

  •  वाइगोत्सकी के सिद्धांत को सामाजिक सांस्कृतिक सिद्धांत भी कहा जाता है। 
  •  बालकों के विकास का महत्वपूर्ण आधार सामाजिक अंतः क्रिया होता है जिसमें बालक का संज्ञानात्मक शारीरिक एवं सामाजिक विकास होता है। 
  •  वाइगोत्सकी अनुसार बालक का विकास समाज के द्वारा होता है। 
  • वाइगोत्सकी के सिद्धांत ZDP(Zone of Proximal Development) ( निकट विकास क्षेत्र) मानसिक कार्य पर आधारित है. 
  •  सामाजिक अंतः क्रिया (Social Interaction)के द्वारा बालक ज्ञान को प्राप्त करता है। 
  •  वाइगोत्सकी ने कहा था कि बालक समाज के साथ अंतर क्रिया के द्वारा ही अपने विचार या भाषा का विकास करता है।  अर्थात भाषा भी सामाजिक अंतः क्रिया के द्वारा ही सीखता है।
  •  बालक में भाषा दो प्रकार की Speech द्वारा सीखी जाती है।

(1) Inner Speech – विचारों से उत्पन्न Thinking या मस्तिष्क से उत्पन्न विचार यांत्रिक वाणी\ सोच को Inner Speech कहते हैं। 

(2) External Speech – इसे शाब्दिक भाषा भी कहा जाता है। इसने बालक अपने विचारों को ध्वनियों में परिवर्तित कर देता है।दूसरों से बातचीत करता है। तो उसे External Speech कहते हैं

  •  वाइगोत्सकी ने कहा था कि बालक में पहले विचार आते हैं फिर भाषा आती है जबकि पियाजे के अनुसार बालक में पहले भाषा आती है और फिर विचार आते हैं। 
  •  दोनों का निष्कर्ष यही निकलता है कि विचार और भाषा एक दूसरे पर आधारित होते हैं।  अतः हम नहीं कह सकते कि पहले क्या आता है क्योंकि जो हम सोचते हैं वह भी एक भाषा है। 

भाषा यंत्र  

यह सामाजिक अंतः क्रिया के द्वारा अपनी ही एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति तक स्थानांतरित करता है।  भाषा के सभी गुण जैसे विचार, भाव, अनुभव, कौशल, ज्ञान, नैतिकता आदि अनुभव वह निम्न प्रकार से प्राप्त करता है। 

(1) अनुकरणीय सीखना(Imitative Learning) – बालक अनुकरण के द्वारा ही भाषा का अधिगम एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाते हैं या प्रगट करते हैं। 

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2  निर्देशात्मक सीखना (Instructional Learning) – इसमें बालक किसी प्रौढ़ व्यक्ति जैसे- अध्यापक या अभिभावक के निर्देशों के माध्यम से ही स्वयं को ज्ञान से परिपूर्ण करता है.

 3 सहकारी अधिगम (Collaborative Learning) –  इसमें बालक अपने साथियों के साथ विशिष्ट कौशलों को समूह बनाकर ग्रहण करते हैं.  अर्थात समान उम्र के बालकों के साथ अधिगम करते हैं. 

 कुल मिलाकर इन तीनों में सामाजिक अंतः क्रिया ही होती है अर्थात सामाजिक-सांस्कृतिक शब्द के साथ ही वाइगोत्सकी की थ्योरी बनती है।  

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