[PDF Notes] Upsarg Aur Pratyay | जानें उपसर्ग तथा प्रत्यत की संपूर्ण जानकारी

हमारे विचारों, भावों तथा संवेदनाओं को संचालित करने के लिए भाषा की प्रमुख भूमिका होती है। किसी भी भाषा में शब्दों का प्रयोग शक्ति के रूप में किया जाता है, इन्ही शब्दों के साथ प्रयोग होने वाले उपसर्ग तथा प्रत्यत (Upsarg Aur Pratyay) भी शब्द शक्ति के हिस्सा होते है जो शब्दों को विशेष रूप देते है।

इस लेख में, हम उपसर्ग और प्रत्यय (Upsarg Aur Pratyay) के गहरे संबंध को छूने का प्रयास करेंगे, जिनसे शब्दों को एक नया और विशेषांकित रूप मिलता है। उपसर्ग और प्रत्यय की परिभाषा, उनके भेद, और उनके उपयोग की विस्तृत जानकारी से हम भाषा के सौंदर्य को समझेंगे।

उपसर्ग (Prefix)

उपसर्ग क्या होते हैं और इसकी परिभाषा: (Prefix- meaning, Definition and their Example in Hindi)

उपसर्ग की परिभाषा: वह शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व अथवा पहले लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं अथवा उसमें नई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं उपसर्ग कहलाते हैं. अथवा लघुत्तम सार्थक शब्द खंड जो अन्य शब्दों के आदि में जुड़ कर उनका अर्थ बदल देते हैं उपसर्ग कहलाते हैं.

“शब्दांश या अव्यय जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।”

शब्द से पूर्व जो अक्षर या अक्षर समूह लगाया जाता है उसे उपसर्ग कहते हैं जैसे सु + पुत्र = सुपुत्र . यहाँ “सु” शब्दांश “पुत्र” शब्द के साथ जुड़कर नए शब्द का निर्माण हुआ हैं. यहाँ ‘सु’ शब्दांश हैं शब्द नहीं हैं. शब्द वाक्य में स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त हो सकता हैं, शब्दांश नहीं. शब्दांश तो केवल किसी शब्द से जुड़कर ही नए अर्थ की रचना में सहायक होते हैं.

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हिन्दी में उपसर्ग के प्रकार:

उपसर्ग मुख्यत चार प्रकार के उपसर्ग होते है:-

(1) संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम)

(2) हिंदी के उपसर्ग (तद्भव)

(3) उर्दू के उपसर्ग

(4) अंग्रेजी के उपसर्ग (विदेशी)

1. संस्कृत के उपसर्ग (तत्सम): संस्कृत के 22 मूल उपसर्ग हैं:-

उपसर्ग  अर्थ उपसर्ग से बने शब्द
अति अधिक   अतिवृष्टि, अतिशीघ्र
अधि                  प्रधान/श्रेष्ठ  अधिनियम, अधिनायक, अधिकृत
परा                            विपरीत पराजय, पराभव, पराक्रम
सु                               अच्छा सुगन्ध, , सुयश, सुमन
अन्                     नहीं/बुरा    अनन्त, अनुपयोगी, अनुपयुक्त,
अभि                         पास      अभिवादन, अभिमान,अभिनव,
अव                 हीनता      अवगुण, अवनति, अवगति
आ                       तक/से      आघात, आरक्षण, आमरण
परि                    चारों ओर  परिक्रमा, परिवार, परिपूर्ण
उप                      सहायक     उपभोग, उपवन, उपमन्त्री
निस्                बिना/बाहर      निश्चय, निश्छल, निष्काम
दुर्                   कठिन/गलत    दुर्दशा, दुराग्रह, दुर्गुण, दुराचार
उत्                            श्रेष्ठ    उत्पत्ति, उत्कंठा, उत्पीड़न
अप                          बुरा       अपयश, अपशब्द, अपकार
अनु          
                
पीछे     अनुचर, अनुज, अनुकरण
प्र                         आगे        प्रदान, प्रबल, प्रयोग, प्रसार
दुस्                    बुरा/कठिन    दुश्चिन्त, दुश्शासन, दुष्कर, दुष्कर्म
नि                             बिना    निडर, निगम, निवास,
निर्                              बिना निराकार, निरादर, नीरोग
प्रति                     प्रत्येक        प्रतिदिन, प्रत्येक, प्रतिकूल
वि                           विशेष     विजय, विहार, विख्यात
सम्                     अच्छी तरह सन्तोष, संगठन,संलग्न

2. हिंदी के उपसर्ग (तद्भव)

हिंदी के कुल 12 उपसर्ग होते हैं। हिन्दी के उपसर्ग ज्यादातर संस्कृत उपसर्गों के अपभ्रंश हैं, ये विशेषकर तद्भव शब्दों के पूर्व आते हैं.वे इस प्रकार हैं ।

उपसर्ग    अर्थ     उपसर्ग से बने शब्द
दु        बुरा/हीनदुर्जन, दुर्बल, दुकाल
सम  समान                  समकोण, समकक्ष, समतल
न                                नहीं   नकुल, नास्तिक, नग,
बहु                         ज्यादा     बहुमूल्य, बहुवचन, बहुमत
उन                         एक कम  उनचालीस, उन्नीस, उनतीस
औ                            अब      औगुन, औगढ़, औसर
आप                           स्वयं    आपकाज, आपबीती, आपकही,
चिर                           सदैव    चिरयौवन, चिरपरिचित,चिरकाल
स                           सहित   सफल, सबल, सगुण, सजीव
भर                                 पूरा भरपेट, भरपूर, भरकम
बिन                           बिना बिनखाया, बिनब्याहा बिनबोया
चौ                              चार    चौराहा, चौमासा, चौपाया,
पर                            दूसरा    परहित, परदेसी, परजीवी,
पच                              पाँच   पचरंगा, पचमेल, पचकूटा,
अन                   नहीं            अनबन, अनपढ़, अनजान
कु                             बुरा      कुपुत्र, कुरूप, कुख्यात
अध                             आधाअधपका, अधमरा, अधजला

3. अंग्रेजी के उपसर्ग (विदेशी):-

अंग्रेजी भाषा के निम्न उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है।

उपसर्ग  अर्थ        उपसर्ग से बने शब्द
हैडमुख्यहैडमास्टर,, हैडक्लर्क , हैडबाॅय
वाइससहायकवाइसराय, वाइस-चांसलर, वाइस-प्रेसीडेंट
सबअधीनसब-रजिस्ट्रार, सब-जज, सब-कमेटी,
हाफआधाहाफकमीज, हाफटिकट, हाफपेन्ट
कोसहितको-आपरेटिव, को-आपरेशन, को-एजूकेशन

(4) उर्दू एवं फ़ारसी के उपसर्ग :

उर्दू एवं फ़ारसी के 14 उपसर्ग होते है :

उपसर्ग         अर्थ        उपसर्ग से बने शब्द
अल           निश्र्चित    अलबत्ता, अलविदा, अलसुबह,
बा                 सहित     बाकायदा, बाइज्जत, बाअदब
बेश            अत्यधिक   बेशकीमती, बेशुमार, बेशक्ल
सर                    मुख्य सरताज, सरदार, सरपंच,
ला                     बिनालावारिस, लाचार, लाजवाब
ग़ैर              के बिना   गैरकानूनी, गैरजरूरी, ग़ैरहाज़िर
ऐन                    ठीक  ऐनवक्त, ऐनजगह, ऐनमौके
कम                 थोड़ा    कमबख्त, कमज़ोर, कमदिमाग,
हम            बराबर       हमउम्र, हमदर्दी, हमराज
खुश             श्रेष्ठता    खुशनुमा, खुशगवार, खुशमिज़ाज
ना                 अभाव   नाराज, नालायक, नामुमकिन
बे                  बिना      बेकाम, बेअसर, बेरहम,
बद                    बुरा   बदसूरत, बदनाम, बददिमाग

भाषा में उपसर्ग का महत्व

  •  उपसर्ग नए शब्द बनाने में सहयोग करते हैं।
  •  भाषा की शब्दावली बढ़ती है।
  •  विलोम शब्द बनाने में उपसर्ग काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
  •  उपसर्ग शब्द के अर्थ ही नहीं बदलते बल्कि उनमें एक नई विशेषता भी लाते हैं। जैसे ख्यात व प्रख्यात शब्दों के अर्थ में कोई अंतर नहीं है लेकिन प्रख्यात शब्द कहने से एक नई विशेषता दिखने लगती है।

प्रत्यय (Suffix)

प्रत्यय क्या होते हैं और इसकी परिभाषा: (Suffix- meaning, Definition and their Example in Hindi)

प्रत्यय की परिभाषा: उपसर्गों की तरह प्रत्यय भी भाषा के लघुत्तम,अर्थवान तथा बद्ध रूप में होते है, जिसमें उपसर्ग तथा प्रत्यय दोनों का प्रकार्य भी एक समान होता है। और दोनों ही नए-नए शब्दों का निर्माण में अपनी-अपनी प्रमुख भूमिका निभाते है। दोनों में अतंर केवल इस बात को लेकर है कि उपसर्ग शब्दों के प्रारम्भ में लगते हैं, तथा प्रत्यय शब्दों के अंत में लगते है। नए शब्दों की रचना में प्रत्यय अहम भूमिका निभाते है। ये शब्दों के पीछे लगते है।कभी कभी प्रत्यय लगाने से अर्थ में कोई बदलाव नहीं होता है।

“ऐसे शब्द जिनका स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता लेकिन वे दुसरे शब्द के बाद लगकर उनका अर्थ बदल देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं।”

उदाहरण :  भूल + अक्कड़  :भुलक्कड़

ऊपर दिए  जैसा की आप देख सकते हैं पहले शब्द था भूल जिसका मतलब था भूलना लेकिन अक्कड़ प्रत्यय लगने के बाद शब्द बन गया भुलक्कड़ जिसका मतलब हुआ वह व्यक्ति जो भूल करता है।

प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं।

(1) क्रत प्रत्यय

(2) तद्वित प्रत्यय 

1. कृत प्रत्यय

वह शब्दांश जो क्रियाओं (धातुओं) के अंत में लगकर नए शब्द की रचना करते हैं कृत प्रत्यय कहलाते हैं । कृत प्रत्यय के योग से बने शब्दों को (कृत+अंत) कृदंत कहते हैं ।

जैसे- वच् + अन् = वचन

घट+ अना= घटना

लिख+आवट= लिखावट

2. तद्धित प्रत्यय

जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम अथवा विशेषण के अंत में लगकर नए शब्द बनाते हैं तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं।

जैसे- आध्यात्म+ इक= आध्यात्मिक ,

पशु+ त्व= पशुत्व

उपसर्ग तथा प्रत्यय में समानता

उपसर्ग तथा प्रत्यय दोनों

1  नए शब्दों का निर्माण करते हैं।

2   भाषा को संबंध तथा शब्द भंडार बढ़ाते हैं।

उपसर्ग तथा प्रत्यय में अंतर (Upsarg Pratyay Mein Antar)

उपसर्ग प्रत्यय
उपसर्ग मूल शब्द से पूर्व लगते हैं। प्रत्यय मूल शब्द के बाद में लगते हैं।
उपसर्ग जुड़ने पर अर्थ विपरीत, नई विशेषता आदि हो सकता है।  प्रत्यय जोड़ने पर मूल शब्द के अर्थ से संबंधित ही अर्थ देते हैं।
मूल शब्द उपसर्ग पर निर्भर करते हैं।  मूल शब्द  पर प्रत्यय निर्भर करते हैं। 
    उपसर्ग मूल शब्द को निर्देशित करता है।  प्रत्यय मूल शब्द  से निर्देशित  होता है। 
  अधिकांश उपसर्गों का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है।  अपवाद स्वरूप ही किसी प्रत्यय का स्वतंत्र अर्थ होता है। 
उपसर्ग अपेक्षाकृत  प्रबुद्ध समाज मे अधिक प्रयुक्त होता है।  अपेक्षाकृत सरल समाज में अधिक प्रयुक्त होता है।
उपसर्ग  बहु दिशा गामी होते हैं,तथा इनका प्रयोग अपेक्षाकृत कठिन होता है।  प्रत्यय एक रेखीय होते हैं,  तथा इनका प्रयोग आसान होता है। 
उद्भव व विकास की दिशा ऊपर से नीचे की ओर होती है। उद्भव व विकास नीचे से ऊपर होता है। 

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