स्टर्नबर्ग का त्रितंत्र का सिद्धांत: Sternberg’s triarchic Theory of Intelligence

Sternberg’s triarchic Theory of Intelligence: स्टर्नबर्ग का त्रितंत्र का सिद्धांत 

इस पोस्ट मे हम (Sternberg’s triarchic Theory of Intelligence) स्टर्नबर्ग का त्रितंत्र का सिद्धांत बुद्धि का त्रितंत्र सिद्धांत का अध्ययन करेंगे जोकि रॉबर्ट जे स्टर्नवर्ग द्वारा 1985 में प्रतिपादित किया गया था. स्टर्नवर्ग ने तीन प्रकार की बुद्धि को तीन उप सिद्धांतों के द्वारा समझाया है।

बुद्धि का त्रितंत्र सिद्धांत 

 प्रतिपादक-  रॉबर्ट जे स्टर्नवर्ग (1985)

रॉबर्ट जे स्टर्नवर्ग ने मानव बुद्धि पर कार्य किया।  इन्होंने मानव IQ को चुनौती देते हुए कहा कि जरूरी नहीं है, जिस व्यक्ति का  IQ Level कम हो वह अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता है । तथा यह भी जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति का IQ Level अच्छा हो वह निश्चित ही अपने जीवन में सफल हो।  एक सफल बुद्धिमान व्यक्ति की सफलता उसकी बुद्धि पर निर्भर करती है। प्रत्येक व्यक्ति में तीन प्रकार की बुद्धि होती है। तीन प्रकार में से वह किसी भी प्रकार की बुद्धि के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।  तीन बुद्धि के वर्णन के कारण इस सिद्धांत का नाम त्रितंत्र सिद्धांत (Sternberg’s triarchic Theory of Intelligence) है। स्टर्नवर्ग ने अपने द्वारा इस सिद्धांत में बुद्धि की व्याख्या की है। 




तीन प्रकार की बुद्धि को उन्होंने तीन उप सिद्धांतों के द्वारा समझाया है। 

त्रितंत्र सिद्धांत 

1.  घटकीय  उपसिद्धांत (Componential Subtheury)

♦ विश्लेषणात्मक बुद्धि (Analytical Intelligence)

 इसमें तीन घटक होते हैं

(1)  मेटा घटक(Meta component) –  यह व्यक्ति को समस्या समाधान तथा योजना बनाने में सक्षम बनाता है. 

(2)  प्रदर्शन घटक( performance component) –  जब व्यक्ति किसी समस्या को हल करने के लिए योजनाएं बनाता है, तो उन योजनाओं को लागू करने में यह घटक मदद करता है।  

(3) ज्ञान अधिग्रहण घटक(Knowledge -acquistion components) – किसी नई जानकारी को प्राप्त करने में, अमूर्त चिंतन करने में इस  घटक का प्रयोग होता है। 

2. अनुभवी उप सिद्धांत(Experimential intelligence) 

रचनात्मक  बुद्धि (Creative intelligence) : रचनात्मक बुद्धि में 2 भाग होते हैं

(1) नवीन(Novelty) –  यह किसी व्यक्ति की पहली बार समस्या से निपटने की क्षमता से संबंधित होता है। 

(2) स्वचालन(Automation) –  यह किसी व्यक्ति की स्वचालित रूप से दोहराए गए कार्यों को करने की क्षमता से संबंधित है।  उदाहरण-  कुछ प्रश्नों से समझ सकते हैं

1. आप कितनी जल्दी नई समस्या को हल करते है। 

2. क्या बे अपने आप नई कौशल का उपयोग करते हैं।  समस्या को हल करने के लिए। 

 उदाहरण-  जेम्स बॉन्ड हर समय नई समस्याओं से निपटने के लिए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करता था वह रचनात्मक  बुद्धि रखता है। 



3.   संदर्भात्मक उपसिद्धांत (Contertual Subtheory)

♦ व्यवहारिक बुद्धि (Practical Intelligence) :  व्यावहारिक बुद्धि में 3 भाग होते हैं। 

 (1)अनुकूलन(Adaptation) – व्यक्ति ने माहौल याद नहीं समस्या से निपटने के लिए उसके अनुसार अपने अंदर बदलाव लाकर, अनुकूल होने की कोशिश करता है। 

 (2) चयन(Selection)-  जब व्यक्ति पूर्णतः नए वातावरण में आ जाता है, तो सोचता है कि कैसे पुराने वातावरण को नए वातावरण के हिसाब से  बदला जाए। 

 (3) आकार देना( shaping)-  इसके दौरान व्यक्ति खुद में कोई बदलाव नहीं लाता  है, बल्कि उसने वातावरण को ही अपने हिसाब से बदल देता है। 

आसान शब्दों में व्यवहारिक बुद्धि का उपयोग रोजमर्रा के कार्यों जैसे- घर, नौकरी, बाजार में आने वाली समस्याओं को दूर करने में किया जाता है।

 इस बुद्धि का विश्लेषण कुछ प्रश्नों से किया जा सकता है। 

1.  क्या व्यक्ति  का आसानी से फायदा  उठाया जा सकता है?

2.  क्या वह अपने आसपास की दुनिया में अच्छी तरह समायोजन कर सकता है?



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