पर्यावरण पेडगॉजी notes : (EVS Pedagogy) Avdharna prastutikaran ke Upagam

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EVS Pedagogy in hindi (पर्यावरण पेडगॉजी notes)

आज के इस आर्टिकल में हम आपके साथ पर्यावरण पेडगॉजी notes(EVS Pedagogy Notes in hindi)का बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक अवधारणा प्रस्तुतीकरण के उपागम( Avdharna prastutikaran ke Upagam) आप सभी के साथ शेयर कर रहे हैं।  इस आर्टिकल में हम ने EVS Pedagogy Notes का टॉपिक 6 को विस्तार पूर्वक बताया है।  इस टॉपिक में क्रिया आधारित अधिगम, सहयोगी अधिगम के नियम,क्रिया आधारित अधिगम हेतु चार चरण,सहयोगी अधिगम के नियम,सहयोगी अधिगम के उपयोग सभी को विस्तार पूर्वक बताया गया है।  (EVS Pedagogy Notes)पर्यावरण पेडगॉजी की अन्य सभी टॉपिक की लिंक आपको नीचे दी गई है।  इसमें पर्यावरण पेडगॉजी(paryavaran pedagogy) के इससे पहले कि सभी टॉपिक को कवर किया गया है। 

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जैसा कि आप सभी को पता होगा कि(पर्यावरण पेडगॉजी notes) EVS pedagogy शिक्षक भर्ती परीक्षा में (हिंदी में ctet पर्यावरण अध्ययन नोट्स pdf) विशेष रूप से पूछी जाती है। आने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक हो जाता है । इसी को ध्यान में रखते हुए हमने आप सभी के साथ इस आर्टिकल को शेयर किया है।  आशा है यह आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा। 


अवधारणा प्रस्तुतीकरण के उपागम (Approaches of Presenting Concepts)

     Topic-6

NCF-2005 शिक्षा तथा अधिगम से रचनात्मक बाल केंद्रित, अधिगम केंद्रित एवं  अनुभावनात्मक दर्शनों पर जो देता है

1   क्रिया आधारित अधिगम(Activity based learning)

  • प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण अध्ययन इसलिए रखा गया है ताकि सभी बच्चों में पर्यावरण की गुणवत्ता एवं प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन हेतु सुग्राही एवं संवेदनशील  लगाव का विकास किया जा सके इसीलिए अध्यापकों को चाहिए कि बच्चों को उनके आसपास के परिवेश से घुलने मिलने के अवसर प्रदान करें।
  • क्रिया आधारित उपागम बच्चों को उनके अपने अनुभवों पर आधारित ज्ञान के निर्माण तथा पुनः निर्माण में व्यस्त करती है।

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एक  शैक्षिक क्रिया निम्न प्रकार की होनी चाहिए। 

  • पर्यावरण अध्ययन के अधिगम उद्देश्य से स्पष्ट ता से जुड़ी हुई।
  • वास्तविक जीवन आधारित तथा बच्चों के लिए सुखद या आनंददायक हो।
  • बच्चों के लिए सुरक्षित हो।
  • पूरा होने में अधिक समय ना लगे।  लंबी क्रिया को मध्यत्तर देकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जा सके।
  • बच्चों के आयु के अनुसार उचित हो।
  • ऐसी हो जो बच्चों में रुचि एवं जिज्ञासा जगाए एवं सार्थक सूचना का प्रदान करें।
  • बच्चों के अनुभवों पर केंद्रित हो व सभी बच्चों को सम्मिलित करें।

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क्रिया आधारित शिक्षण अधिगम का आयोजन कराना

क्रिया आधारित अधिगम हेतु चार चरण होते हैं जो इस प्रकार है।

(1)  नियोजन(Planning)

  • अधिगम उद्देश्य की पहचान कर ली जाए जो नियोजित क्रिया द्वारा प्राप्त किए जाएंगे।
  • विभिन्न संसाधनों की सूची बनाएं तथा प्रबंध  करें- सामग्री, संसाधन( अधिगम), स्वयंसेवक आदि।
  • प्रिया के बाद संक्षिप्त चर्चा की योजना भी आपके द्वारा बनाई जानी चाहिए।  आपको इस बात का भी अंदाजा होना चाहिए कि आप किस प्रकार के मूल्यांकन करेंगे । विद्यार्थियों का एवं   क्रिया के प्रभाव का।

(2)  क्रिया को संचालित करना(Operate the activity)

  • क्रिया को शुरू करना –  बच्चों को क्रिया से अवगत कराएं तथा उनके अर्थ एवं उद्देश्य के बारे में बताएं।  उनकी भूमिका के बारे में, कितना समय लगेगा, मूल्यांकन कैसे होगा।
  • क्रिया करवाएं – क्रिया  शुरू होने के बाद देखे कि बच्चे क्रिया  करने में सार्थक रूप से योग्य है या नहीं सब बच्चों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
  • क्रिया का समापन कराएं-  बच्ची अपने अनुभवों के बारे में विचार-विमर्श करें तथा पर्यावरण अध्ययन से जुड़ी हुई  सीख उनमें से निकले।

 (3) कार्य का मूल्यांकन(Evaluation)

  • एक अध्यापक होने के नाते आपको कार्य का मूल्यांकन भी करना है ताकि यह पता चल सके कि जिन शैक्षिक उद्देश्यों को आप क्रिया के द्वारा प्राप्त कराना चाहते थे उनकी प्राप्ति हो पाई या नहीं।  
  • जब बच्चे क्रिया कर रहे होते हैं उस दौरान उनका ध्यान से अवलोकन किया जाना चाहिए।
  • जब पुनर्निवेशन  की आवश्यकता है। उसी समय दिया जा सकता है, और प्रगति की जांच   निर्माणात्मक मूल्यांकन द्वारा की जानी चाहिए।
  • अंत में क्रिया  संकलित मूल्यांकन करें ताकि हर बच्चेकी क्रिया में भागीदारी का मूल्यांकन हो पाए।

(4)  प्रक्रिया  पर पुनर्विचार करना(Reconsider the activity)   

  • कुछ समय इस बात पर विचार करें कि क्या अच्छा रहा और क्या नहीं और क्यों?
  • पुनः विचार भविष्य में आपको किसी भी क्रिया को बेहतर रूपरेखा देने, योजना बनाने एवं क्रिया  मैं आवश्यक सुधार करने में सहायता करेंगे।

क्रिया आधारित अधिगम उपागमो के उपयोग   

    • अमूर्त अवधारणाओं को प्रयोगात्मक अनुभव या निदर्शन द्वारा स्पष्ट करने में सहायता करते हैं।
    • बहु ज्ञानेंद्रियों को प्रयोग करने का अवसर प्रदान करते हैं।  जैसे कि देखना, सुनना, छूना, सुघना एवं स्वाद इत्यादि। इस प्रकार जो सीखा जाता है अधिक समय तक बना रहता है।
    • विषय वस्तु सिखाने के अलावा कई जीवन कौशल सिखाए जाते हैं।
    • बच्चों की दृष्टिकोण से सीखने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है।  ना कि बड़ों के दृष्टिकोण से।
    • समस्याएं एवं समाधान ओं को ढूंढने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाता है।  जिससे आत्म सम्मान का विकास होता है।
    • “हाथ से काम करके सीखना” तथा “करके सीखना” पर बल देती है।
    • विज्ञान, गणित इत्यादि के नियमों को बच्चों की परीक्षित परिस्थितियों से जोड़कर अच्छी समझ विकसित करने में सहायता करते हैं।
    • इसमें सृजनात्मकता तथा लचीलापन को बढ़ावा मिलता है।
    • बच्चे को शारीरिक एवं मानसिक दोनों पक्षों को प्रयोग करने का अवसर प्रदान होता है।




 पर्यावरण अध्ययन की एक क्रिया का उदाहरण
  • अपने  कचरे को अलग करें   

उद्देश्य-  अलग-अलग प्रकार के कपड़े की पहचान, अलग करने का महत्व बता सके।

सहयोगी अधिगम उपागम(Associate learning approach)   

परिभाषाएं (Definition)   

(1) बरोड़ी तथा डेविस के अनुसार – “सहयोगी अधिगम शिक्षण उपागम है, जो पढ़ने के अनेकों तरीकों को जन्म देती है, जो सभी बच्चों को एक ही उद्देश्य की और समूहों में काम करने,   कार्य को बांटने की और लगाते हैं। इस प्रकार से कि वह ऐसा व्यवहार करें जिससे परस्पर निर्भरता दिखती हो तथा प्रत्येक बच्चे की भागीदारी तथा प्रयास भी नजर आते हो।”

(2) जी. जैकबज के अनुसार – ” सहयोगी अधिगम समूह में काम करने के मूल्य को बढ़ावा देने वाली अवधारणा एवं तकनीक है। “ सहयोगी अधिगम में समूहों में काम करना होता है।  पर्यावरण अध्ययन में यह महत्वपूर्ण अंतर्निहित मूल्य है, कि इकट्ठे सीखना चाहिए।

सहयोगी अधिगम शिक्षकों को निम्नलिखित के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
  • “मूल्य” सीखने सिखाने की  पारंपरिक आदर्श सोच से निकलने के लिए।
  • बच्चों को सहयोग की भावना समझने में सहायता करने के लिए।
  • यह समझने के लिए कि व्यक्तियों में अंतर होते हैं तथा   भिन्नताए लोकतंत्र हेतु आवश्यक है।
  • बच्चों के सामाजिक संदर्भ का महत्व समझने के लिए।

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सहयोगी अधिगम के नियम

सहयोगी अधिगम के तीन अति महत्वपूर्ण सिद्धांत निम्न है।

(1)  सकारात्मक रूप से एक दूसरे पर निर्भरता

इसमें शामिल है समूह का एक सांझा उद्देश्य हो,सभी के संसाधन सांझा हो, एक समूह की एक पहचान बनाई जाए( जैसे समूहों नाम)।  इसके द्वारा सकारात्मक भावनाओं एवं मनोवृत्ति यों पर जोर दिया जाता है।

(2) व्यक्तिगत जिम्मेदारी

 यह बहुत महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक बच्चों को कुछ ना कुछ काम दिया जाए तथा कुछ कार्य समूह के सभी सदस्य इकट्ठे होकर करें।

(3) सामान स्तर पर सहक्रियाएं  

समूह के सदस्यों के बीच समान स्तर पर सहक्रियाएं  समूह के सहज कार्य हेतु आवश्यक होती हैं। शिक्षक का कार्य होगा कि शिक्षार्थी एक दूसरे के साथ सम्मान पूर्वक व्यवहार करें। समाधि स्थल की सहक्रियाएं  के लिए आवश्यक है कि शिक्षक प्रत्येक शिक्षार्थी को जानते हो।

सहयोगी अधिगम के उपयोग

  • सहयोगी अधिगम बच्चों में दूसरों के दृष्टिकोण एवं विचारों को समझने की योग्यता को बढ़ाता है।
  • बच्चों की एक दूसरे के साथ घुलने मिलने के कौशलों को विकसित करने में सहायता करता है।
  • समस्याओं को सुलझाने के आपात स्थिति को संभालने के तथा फैसले करने को कौशल का विकास करता है।
  • सहयोगी अधिगम बच्चों को अलग प्रकार से लेकिन परिस्थिति के अनुसार उचित प्रक्रिया करने में योग्य बनाता है।
  • सहयोगी अधिगम परिस्थितियां बच्चों को इस प्रकार के अवसर देती है कि वे  बहुआयामी विचारों की छानबीन कर सके तथा प्रतीक बच्चे से संबंधित संभावनाओं एवं परिणामों का अंदाजा लगा सके तथा उन पर तर्क वितर्क कर सके।
  • पर्यावरण अध्ययन शिक्षण अधिगम विश्लेषणात्मक सोच तथा समस्याओं के समाधान से संबंधित है।  सहयोगी अधिगम काफी हद तक शिक्षार्थियों में इन कौशलों का विकास करने में सहायता कर सकता है।

सहयोगी अधिगम की चुनौतियां

    •  सहयोगी अधिगम सत्र की आवश्यकता और फिर उद्देश्य वर्णन करना बहुत महत्वपूर्ण है पाठ्यक्रम के साथ इस क्रिया की कड़ियां जोड़ने सत्र से पहले तथा बाद शिक्षक द्वारा चर्चा आदि की योजना बनाने में काफी समय तथा क्रिया योजना चाहिए खासतौर पर प्रत्येक बच्चे के मूल्यांकन से संबंधित।
    • एक शिक्षक होने के नाते आप को छानबीन करने, प्रश्न करने, रास्ते ढूंढ कर  निकाल तो रहने, बच्चों को अर्थपूर्ण ढंग से समूह कार्य द्वारा सीखते रहने में सहायता करना है।
    • एक प्रभावी सहयोगी अधिगम समूहों  को बनाने के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक अपने शिक्षार्थियों से भलीभांति परिचित हो।
    • बच्चों को अलग-अलग समूह में रखना एक कठिन प्रक्रिया है जो ध्यान पूर्वक किया जाना चाहिए।
    • सहयोगी समूह  बनाते समय विभिन्न अधिगम कौशल संस्कृति पृष्ठभूमि, व्यक्तित्व तथा लिंग का भी ध्यान रखना पड़ेगा।




EVS Pedagogy Notes (*Topic Wise*) Notes

Topic-1 – पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा एवं क्षेत्र (Concept and scopes of Evs): click here
Topic-2 –  पर्यावरण अध्ययन का महत्व एवं एकीकृत पर्यावरण अध्ययन(Significance of Evs, Integrated Evs): click here
Topic- 3 –  पर्यावरण अध्ययन(Environmental studies),पर्यावरण शिक्षा: click here
Topic- 4 –  अधिगम के सिद्धांत (Learning principles): click here

 

इस पोस्ट में हमने पर्यावरण पेडगॉजी notes (Avdharna prastutikaran ke Upagam) आप सभी के साथ शेयर किए हैं आशा है यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी!!! 

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